मुख्य बिंदु: बाड़मेर जिले (मालाणी अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य उपनाम: थार की कला व हस्तशिल्प नगरी, मालाणी प्रदेश, राजस्थान की दुबई (तेल/पेट्रोलियम भंडार के कारण), बाहाड़मेर। स्थापना: 13वीं शताब्दी में परमार शासक राव बाहड़ (बाहाड़ राव) द्वारा (पहाड़ी पर बाहाड़मेर बसाया […]
बाड़मेर जिले (मालाणी अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:
1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य
- उपनाम: थार की कला व हस्तशिल्प नगरी, मालाणी प्रदेश, राजस्थान की दुबई (तेल/पेट्रोलियम भंडार के कारण), बाहाड़मेर।
- स्थापना: 13वीं शताब्दी में परमार शासक राव बाहड़ (बाहाड़ राव) द्वारा (पहाड़ी पर बाहाड़मेर बसाया गया)।
- भौगोलिक स्थिति व नदियाँ:
- नदियाँ: लूनी नदी (बालोतरा तक इसका पानी मीठा रहता है, उसके बाद खारा हो जाता है), सूकड़ी।
- पहाड़ियाँ: छप्पन की पहाड़ियाँ (सिवाना क्षेत्र में गोलाकार पहाड़ियाँ; नाकोड़ा पर्वत), हल्देश्वर पहाड़ी।
- बालुका स्तूप: महाबार के रेतीले धोरे (Mahabar Sand Dunes)।
- खनिज व ऊर्जा:
- खनिज तेल (पेट्रोलियम): मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या, शक्ति, कामेश्वरी, सरस्वती आदि प्रमुख तेल क्षेत्र।
- लिग्नाइट कोयला: गिरल, कपूरड़ी, जालीपा, भादरेश (गिरल में राज्य का पहला गैसीकरण आधारित ताप विद्युत संयंत्र)।
- बेंटोनाइट व मुल्तानी मिट्टी: बाड़मेर प्रमुख उत्पादक क्षेत्र।
2. राजवंश एवं प्रमुख शासक
- राजवंश: परमार वंश (प्रारंभिक शासक किराडू क्षेत्र), प्रतिहार, चौहान और बाद में राठौड़ वंश (मालाणी शाखा)।
- प्रमुख शासक व व्यक्तित्व:
- रावल मल्लीनाथ जी (14वीं सदी): मारवाड़ के प्रतापी वीर योद्धा, सिद्ध संत व लोकदेवता; इनके नाम पर पूरे क्षेत्र का नाम ‘मालाणी’ पड़ा। 1378 ई. में फिरोजशाह तुगलक व मालवा के सूबेदार निजामुद्दीन की संयुक्त सेना को पराजित किया।
- राव जगमाल: मल्लीनाथ जी के वीर पुत्र, जिन्होंने गुजरात की सेना से युद्ध कर अमूल्य सेवाएं दीं।
- राव कान्हड़दे परमार: किराडू के प्रारंभिक शासक।
3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ एवं पुरातात्विक स्थल
- तिलवाड़ा सभ्यता:
- लूनी नदी के तट पर स्थित मध्य पाषाण कालीन (Mesolithic) स्थल।
- उत्खनन: वी.एन. मिश्र (1967-68 ई.)।
- यहाँ से पशुपालन और अग्नि कुंडों के प्राचीन साक्ष्य मिले हैं।
- किराडू (प्राचीन नाम: किरातकूप):
- 11वीं-12वीं शताब्दी में परमारों की राजधानी; महा-मारू एवं गुर्जर-प्रतिहार स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट केंद्र।
4. प्रमुख दुर्ग, मंदिर एवं स्थापत्य
| स्मारक / स्थल | निर्माता | प्रमुख विशेषता |
| किराडू के मंदिर | परमार शासक (11वीं-12वीं सदी) | 5 मंदिरों का समूह (मुख्य मंदिर: सोमेश्वर महादेव); इसे ‘राजस्थान का खजुराहो’ कहा जाता है। अपनी उत्कृष्ट कामुक व बारीक मूर्तिकला के लिए विख्यात। |
| सिवाना दुर्ग (गढ़ सिवाना) | वीर नारायण पंवार (954 ई.) | हल्देश्वर पहाड़ी पर स्थित; इसे ‘जालौर दुर्ग की कुंजी’ और ‘मारवाड़ के राजाओं की शरणस्थली’ (मालदेव व चंद्रसेन का आश्रय स्थल) कहा जाता है। (ऐतिहासिक दृष्टि से बाड़मेर/बालोतरा अंचल)। |
| नाकोड़ा जैन तीर्थ (मेवानगर) | आलमशाह काल में जीर्णोद्धार | 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ को समर्पित; इसे ‘हाथ का हुजूर’ व ‘जागती ज्योत’ कहा जाता है; भैरव जी की चमत्कारी प्रतिमा स्थित है। |
| कोटड़ा का किला (शिव तहसील) | परमार शासक | पहाड़ी पर स्थित प्राचीन सामरिक महत्व का दुर्ग। |
| बटाडू का कुआं (बायतु) | रावल गुलाब सिंह | सफेद संगमरमर से निर्मित कलात्मक कुआं; इसे ‘रेगिस्तान का जलमहल’ कहा जाता है। |
| पीपलूद (हल्देश्वर महादेव) | प्राकृतिक तीर्थ | छप्पन की पहाड़ियों में स्थित; अत्यधिक ठंडक और वर्षा के कारण इसे ‘राजस्थान का लघु माउंट आबू’ कहा जाता है। |
5. प्रमुख ऐतिहासिक युद्ध एवं सिवाना के साके
- सिवाना का प्रथम साका (1308 ई.):
- आक्रमणकारी: अलाउद्दीन खिलजी।
- शासक/सेनापति: शीतलदेव (सातलदेव) व सोमा।
- भायला पंवार के विश्वासघात से दुर्ग का पतन; वीरांगनाओं ने जौहर किया। खिलजी ने सिवाना का नाम बदलकर ‘खैराबाद’ रखा।
- सिवाना का द्वितीय साका (1582 ई.):
- अकबर की सेना (मोटा राजा उदयसिंह के नेतृत्व में) का आक्रमण; वीर कल्ला रायमलोत ने केसरिया किया और रानी हाड़ी भानकंवर के नेतृत्व में जौहर हुआ।
6. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं तीर्थ
- लोकदेवता रावल मल्लीनाथ जी (तिलवाड़ा):
- जन्म: गोपड़ी (बाड़मेर); गुरु: उगमसी भाटी; पत्नी: रानी रूपादे (स्वयं पूज्य लोकदेवी)।
- 1399 ई. में मारवाड़ में कुंडा पंथ की स्थापना की और हरि-कीर्तन (मेगा संत सम्मेलन) आयोजित कराया।
- मल्लीनाथ पशु मेला (तिलवाड़ा): चैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशी तक लूनी नदी के पेटे में लगने वाला राजस्थान का सबसे प्राचीन पशु मेला (थारपारकर व कांकरेज नस्ल के गौवंश व मालाणी नस्ल के घोड़ों की खरीद-फरोख्त)।
- आलम जी (धोरीमन्ना):
- जैतमलोत राठौड़; धोरीमन्ना की रेतीली ढाणी में मंदिर स्थित है, जिसे ‘घोड़ों का तीर्थ स्थल’ कहा जाता है।
- रानी भटियाणी (जसोल):
- लोकदेवी स्वरूप पूज्य; इन्हें स्थानीय रूप से ‘माजीसा’ कहा जाता है (मेला: भाद्रपद व माघ वदी त्रयोदशी)।
- ब्रह्मा मंदिर (आसोतरा):
- पुष्कर के बाद भारत का दूसरा प्रमुख ब्रह्मा जी का मंदिर; इसका निर्माण संत खेताराम जी महाराज ने 1984 में करवाया था।
- नागणेची माता (नागाणा गाँव):
- राठौड़ों की कुलदेवी; 18 भुजाओं वाली काष्ठ प्रतिमा जिसे राव धूहड़ कर्नाटक से लाए थे।
7. कला, संस्कृति एवं हस्तशिल्प
- अजरक प्रिंट व मलीर प्रिंट:
- अजरक प्रिंट: लाल और नीले (Indigo) रंग की दोनों तरफ छपाई (ज्यामितीय आकृतियाँ)।
- मलीर प्रिंट: कत्थई (काला-भूरा) रंग की एकतरफा छपाई।
- खत्री समुदाय द्वारा लकड़ी के ठप्पों (Blocks) से तैयार।
- कशीदाकारी व पैचवर्क (Applique Work):
- दर्पण जड़ित कशीदाकारी और रल्लियां (पारंपरिक रजाई/बिछौने) विश्व प्रसिद्ध हैं (प्रसिद्ध शिल्पी: रूमा देवी – नारी शक्ति पुरस्कार विजेता)।
- काष्ठ नक्काशी व फर्नीचर:
- शीशम व रोहिड़े की लकड़ी पर बारीक जालीदार नक्काशीदार फर्नीचर।
- लोक नृत्य व संगीत:
- गैर नृत्य: कनाना और लाखेटा गाँव की आंगी-बांगी गैर और तलवारों की गैर।
- थार महोत्सव: बाड़मेर के लोक जीवन और संस्कृति को प्रदर्शित करने वाला राज्य स्तरीय वार्षिक उत्सव।
- लंगा व मांगणियार लोक गायकों का पारंपरिक गढ़।
8. प्रमुख विभूतियाँ एवं संस्थान
- रूमा देवी: बाड़मेर की अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सामाजिक कार्यकर्ता व हस्तशिल्प डिजाइनर; ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी बनाने हेतु ‘नारी शक्ति पुरस्कार (2018)’ से सम्मानित।
- मालाणी नस्ल के घोड़े: अपनी गति, कद-काठी और सुंदरता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध।
- थारपारकर व कांकरेज गाय: पश्चिमी राजस्थान की उच्च दुग्ध उत्पादक देशी गौवंश नस्लें।
- उत्तरलाई वायुसेना स्टेशन (Uttarlai AFB): भारत का पहला भूमिगत हवाई अड्डा (Underground Airbase)।
9. स्वतंत्रता संग्राम एवं किसान आंदोलन
- बाड़मेर में जन जागृति:
- मारवाड़ लोक परिषद और जयनारायण व्यास के आंदोलनों का सीधा प्रभाव।
- वृद्ध भारत समाज व मारवाड़ किसान सभा: जागीरदारी व ‘बैठ-बेगार’ प्रथा के विरुद्ध आंदोलन।
- गुड़ामालानी किसान संघर्ष: किसानों ने लाग-बाग और गैर-कानूनी करों के विरुद्ध संगठित मोर्चा खोला।
- हरिभाऊ किंकर व किशनलाल जोशी: बाड़मेर अंचल में शिक्षा व चेतना के प्रचारक।