मुख्य बिंदु: जैसलमेर जिले (थार व मांड अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य उपनाम: स्वर्ण नगरी (Golden City), पीले पत्थरों का शहर, हवेलियों व झरोखों का नगर, म्यूजियम सिटी, पंखों की नगरी (पवन ऊर्जा के कारण), मांड धरा व वल्ल-मंडल। स्थापना: 12 जुलाई […]
जैसलमेर जिले (थार व मांड अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:
1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य
-
उपनाम: स्वर्ण नगरी (Golden City), पीले पत्थरों का शहर, हवेलियों व झरोखों का नगर, म्यूजियम सिटी, पंखों की नगरी (पवन ऊर्जा के कारण), मांड धरा व वल्ल-मंडल।
-
स्थापना: 12 जुलाई 1155 (श्रावण शुक्ल द्वादशी) को यदुवंशी भाटी शासक रावल जैसल द्वारा त्रिकूट पहाड़ी पर जैसलमेर की नींव रखी गई।
-
भौगोलिक स्थिति व क्षेत्रफल:
-
क्षेत्रफल: 38,401 वर्ग किमी (राजस्थान का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा जिला; राज्य के कुल क्षेत्रफल का 11.22%)।
-
जनसंख्या घनत्व: 17 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी (राजस्थान में न्यूनतम जनघनत्व वाला जिला)।
-
राजस्थान का सबसे पश्चिमी बिंदु: कटरा गाँव (सम तहसील) — $69^\circ 30’$ पूर्वी देशांतर।
-
-
भू-आकृति, नदियाँ एवं जलस्रोत:
-
काकनेय (काकनी / मसूरदी नदी): कोटड़ी गाँव से निकलकर आंतरिक प्रवाह में ‘बुझ झील’ का निर्माण करती है (राजस्थान की सबसे छोटी आंतरिक नदी – मात्र 17 किमी)।
-
लाठी सीरीज (Lathi Series): पोकरण से मोहनगढ़ तक विस्तृत 60 किमी लंबी भूगर्भीय मीठे पानी की जलपट्टी; इस पर पौष्टिक ‘सेवण’ (लिलोन) घास पाई जाती है।
-
चांदन नलकूप: लाठी सीरीज में स्थित मीठे जल का स्रोत; इसे ‘थार का घड़ा’ कहा जाता है।
-
सम के बालुका स्तूप (Sam Sand Dunes): पूर्णतः वनस्पति रहित बालुका स्तूप (धोरे); राजस्थान में मरुस्थलीय पर्यटन का केंद्र।
-
गड़ीसर (गड़सीसर) झील: रावल घड़सी द्वारा 14वीं सदी में निर्मित ऐतिहासिक मीठे पानी का सरोवर (मुख्य प्रवेश द्वार: ‘टीलों की प्रोल’)।
-
-
ऊर्जा संपदा:
-
प्राकृतिक गैस: घोटारू (हीलियम व मीथेन गैस के भंडार), मनिहारी टिब्बा, डांडेवाला, तनोट, बाघेवाला।
-
पवन ऊर्जा: बड़ाबाग, अमर सागर, सोढ़ा (राजस्थान का सबसे बड़ा विंड फार्म)।
-
सौर ऊर्जा: नोख (विशाल सोलर पार्क), भड़ला सीमावर्ती क्षेत्र।
-
2. राजवंश एवं प्रमुख शासक
-
राजवंश: यदुवंशी भाटी राजवंश (स्वयं को भगवान श्रीकृष्ण का वंशज मानते हैं)।
-
उपाधि: ‘उत्तर भड़ किवाड़’ (उत्तरी सीमा के रक्षक)।
-
राजधानियों का क्रम: तनोट $\rightarrow$ लोद्रवा $\rightarrow$ जैसलमेर।
-
प्रमुख शासक व योगदान:
-
मंगल राव व देवराज भाटी: 9वीं सदी में भाटी राज्य को सुदृढ़ किया (देवराज ने ‘रावल’ की उपाधि धारण की और लोद्रवा को राजधानी बनाया)।
-
रावल जैसल (1155 ई.): लोद्रवा से राजधानी बदलकर जैसलमेर दुर्ग का निर्माण कराया।
-
रावल मूलराज प्रथम: अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय दुर्ग की रक्षा की।
-
रावल हरराज भाटी (1570 ई.): अकबर के नागौर दरबार में मुग़ल अधीनता स्वीकार की और वैवाहिक संबंध स्थापित किए।
-
महारावल मूलराज द्वितीय: 12 दिसंबर 1818 को ईस्ट इंडिया कंपनी (अंग्रेजों) से अधीनस्थ संधि की।
-
महारावल जवाहर सिंह: 20वीं सदी के आधुनिक शासक (स्वतंत्रता के समय जैसलमेर के शासक: महारावल रघुनाथ सिंह)।
-
3. जैसलमेर के प्रसिद्ध ढाई साके (2.5 Sakas)
जैसलमेर दुर्ग अपने ढाई साकों (2.5 Sakas) के लिए विश्व विख्यात है:
-
प्रथम साका (लगभग 1312–1316 ई.):
-
शासक: रावल मूलराज प्रथम।
-
आक्रमणकारी: अलाउद्दीन खिलजी।
-
राजपूतों ने केसरिया किया और रानियों ने जौहर किया।
-
-
द्वितीय साका (1370–1371 ई.):
-
शासक: रावल दूदा (त्रिलोकी सिंह)।
-
आक्रमणकारी: दिल्ली सुल्तान फिरोजशाह तुगलक।
-
भीषण युद्ध के बाद वीरों ने केसरिया और महिलाओं ने जौहर किया।
-
-
अर्द्ध साका (1550 ई. – तीसरा अधूरा साका):
-
शासक: रावल लूणकरण।
-
आक्रमणकारी: कंधार का भगोड़ा अमीर अली खां (विश्वासघात से हमला)।
-
विशेषता: राजपूत योद्धाओं ने वीरतापूर्वक युद्ध कर केसरिया किया और अमीर अली को मार गिराया, किंतु अचानक हुए हमले के कारण जौहर का समय नहीं मिला; अतः इसे ‘अर्द्ध साका’ (आधा साका) कहा जाता है।
-
4. प्रमुख दुर्ग, हवेलियाँ एवं स्थापत्य
| स्मारक / स्थल | निर्माता | प्रमुख विशेषता |
| सोनार किला (जैसलमेर दुर्ग) | रावल जैसल (1155 ई.) | त्रिकूट पहाड़ी पर पीले बलुआ पत्थर से बिना चूने-गारे के केवल पत्थरों को जोड़कर (Interlocking) बना धान्वन दुर्ग; इसमें 99 बुर्ज हैं। कर्नल टॉड ने इसे ‘रेगिस्तान में लंगर डाले जहाज’ जैसा बताया। यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल (2013)। |
| पटवों की हवेली | सेठ गुमानचंद बाफना (1805 ई.) | 5 भाइयों हेतु निर्मित 5 मंजिला भव्य हवेली समूह; पत्थर की बारीक जालीदार नक्काशी व झरोखों हेतु विश्व विख्यात। |
| सालिम सिंह की हवेली | दीवान सालिम सिंह (18वीं सदी) | 9 मंजिला हवेली (नीचे के 6 खंड पत्थर के व ऊपर के 3 खंड लकड़ी व शीशे के); इसके 8वें खंड को ‘मोती महल’ व 9वें खंड को ‘जहाज महल’ कहते हैं। |
| नथमल की हवेली | दीवान नथमल (1881–85 ई.) | दो भाइयों (हाथी और लालू) द्वारा निर्मित; मुख्य द्वार पर पीले पत्थर के तराशे हुए दो सजीव हाथी खड़े हैं। |
| बड़ाबाग की छतरियाँ | भाटी राजवंश | जैसलमेर के महारावलों की कलात्मक व नक्काशीदार समाधि छतरियाँ। |
| लोद्रवा के जैन मंदिर | प्राचीन राजधानी | अमर सागर के निकट; कल्पवृक्ष व सहस्त्रफणा पार्श्वनाथ मंदिर; पास ही ऐतिहासिक ‘मूमल की मेड़ी’ (काक नदी तट) स्थित है। |
| जिनभद्र सूरी ज्ञान भंडार | जैन आचार्य जिनभद्र सूरी | जैसलमेर दुर्ग के तलघर में स्थित भारत का सबसे प्राचीन व दुर्लभ हस्तलिखित ताड़पत्रीय पांडुलिपि संग्रहालय। |
5. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं सीमा तीर्थ
-
लोकदेवता बाबा रामदेव जी (रामदेवरा / रुणेचा धाम, पोकरण):
-
जन्म: उंडूकाश्मीर (शिव तहसील, बाड़मेर) में तंवर वंशीय अजमाल जी के घर; समाधि: रुणेचा (जैसलमेर, 1458 ई.)।
-
सांप्रदायिक सद्भाव के महाप्रतीक; हिंदू इन्हें ‘कृष्ण अवतार’ व मुस्लिम इन्हें ‘रामसा पीर’ मानते हैं।
-
इन्होंने ‘कांबड़िया पंथ’ चलाया; एकमात्र लोकदेवता जो कवि भी थे (रचना: ‘चौबीस बाणियां’)।
-
मेला: भाद्रपद शुक्ल द्वितीया (बाबे री बीज) से भाद्रपद शुक्ल एकादशी तक राज्य का सबसे बड़ा लक्खी मेला।
-
-
तनोट माता मंदिर (तनोट, भारत-पाक सीमा):
-
उपनाम: ‘थार की वैष्णो देवी’, ‘सैनिकों की देवी’, ‘रुमाली माता’।
-
1965 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तानी सेना द्वारा गिराए गए 3000 से अधिक बम इस मंदिर परिसर में एक भी नहीं फटे (मंदिर की पूजा-अर्चना का संपूर्ण कार्य सीमा सुरक्षा बल – BSF के जवान करते हैं)।
-
-
स्वांगिया माता / आवड़ माता:
-
भाटी राजवंश की कुलदेवी; प्रतीक चिन्ह: मुड़ा हुआ भाला (स्वांग) एवं शगुन चिड़िया (पालकी)।
-
-
घंटियाली माता मंदिर: तनोट के निकट स्थित; 1965 के युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों के आपस में लड़कर मरने का चमत्कारिक स्थल।
6. कला, संस्कृति, हस्तशिल्प एवं राष्ट्रीय मरु उद्यान
-
राष्ट्रीय मरु उद्यान (Desert National Park, 1981):
-
क्षेत्रफल: 3,162 वर्ग किमी (जैसलमेर 1900 वर्ग किमी + बाड़मेर 1262 वर्ग किमी); राजस्थान का क्षेत्रफल में सबसे बड़ा वन्यजीव अभयारण्य।
-
गोडावण (Great Indian Bustard): राज्य पक्षी गोडावण (स्थानीय नाम: ‘मालमोरड़ी’ / ‘सोहन चिड़िया’) का प्रमुख प्राकृतिक प्रजनन केंद्र।
-
आकल वुड फॉसिल पार्क (Akal Wood Fossil Park): 18 करोड़ वर्ष पुराने (जुरासिक काल) काष्ठ जीवाश्मों (Fossils) का दुर्लभ भू-वैज्ञानिक स्थल।
-
-
लोक संगीत व वाद्ययंत्र:
-
मांगणियार लोक कलाकार: कामायचा, खड़ताल, मोरचंग व सारंगी के साथ ‘मांड गायकी’ का वैश्विक प्रदर्शन करने वाले कलाकार (पद्मश्री साकर खां मांगणियार – कामायचा सम्राट, गाजी खां बरणई)।
-
-
मरु महोत्सव (Desert Festival):
-
पर्यटन विभाग द्वारा प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा (जनवरी-फरवरी) को सम के धोरों पर आयोजित (मिस्टर डेजर्ट, मिस मूमल व ऊंट दौड़ प्रतियोगिताएं)।
-
-
हस्तशिल्प:
-
पट्टू बुनाई व बरड़ी: ऊन की कलात्मक चादरें व लोई।
-
पीले पत्थर की नक्काशी व नक्काशीदार बर्तन: जीवाश्म युक्त हबूर पत्थर (जिसमें रखे दूध से बिना जामन के प्राकृतिक रूप से दही जम जाता है)।
-
7. पोकरण परमाणु परीक्षण — भारत की परमाणु शक्ति का केंद्र
-
प्रथम भूमिगत परमाणु परीक्षण (‘ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा’):
-
तिथि: 18 मई 1974; प्रधानमंत्री: इंदिरा गांधी; स्थल: मलका रोड, पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज।
-
-
द्वितीय परमाणु परीक्षण (‘ऑपरेशन शक्ति’):
-
तिथि: 11 व 13 मई 1998 (कुल 5 परीक्षण); प्रधानमंत्री: अटल बिहारी वाजपेयी; वैज्ञानिक नेतृत्व: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम। (11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है)।
-
8. स्वतंत्रता संग्राम, प्रजामंडल एवं जन आंदोलन
-
सागरमल गोपा (1900–1946 ई.):
-
जैसलमेर के अमर क्रांतिकारी व स्वतंत्रता सेनानी।
-
महारावल जवाहर सिंह के निरंकुश शासन और अत्याचारों के विरुद्ध पुस्तकें लिखीं:
-
‘जैसलमेर का गुंडाराज’
-
‘रघुनाथ सिंह का मुकदमा’
-
‘आजादी के दीवाने’
-
-
3 अप्रैल 1946 को जेल में पुलिस उपाधीक्षक गुमान सिंह द्वारा मिट्टी का तेल छिड़ककर इन्हें जिंदा जला दिया गया (शहादत: 4 अप्रैल 1946; जांच आयोग: गोपालस्वरूप पाठक आयोग)।
-
-
जैसलमेर प्रजामंडल (1945 ई.):
-
15 दिसंबर 1945 को मीठालाल व्यास द्वारा जोधपुर में स्थापित (रियासत से बाहर स्थापित प्रजामंडल)।
-
-
जवाहर दिवस (16 नवंबर 1930): जैसलमेर में राजनीतिक चेतना के तहत मनाया गया ऐतिहासिक दिवस।
-
राजस्थान एकीकरण (30 मार्च 1949): चतुर्थ चरण (वृहत् राजस्थान) में जैसलमेर का राजस्थान में पूर्ण विलय हुआ।