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कोटा जिला: ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं साहित्यिक परिदृश्य

कोटा, राजस्थान जिला दर्शन (District GK) पढ़ने का समय: ~1 मिनट RPSC / RSMSSB Special
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सत्यापित: 31 August 2026
मुख्य बिंदु: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य उपनाम: राजस्थान की शिक्षा नगरी (Coaching Hub), राजस्थान का कानपुर (औद्योगिक नगरी), उद्यानों का नगर, हाड़ौती का हृदय स्थल, राजस्थान का नालंदा। स्थापना: प्रारंभ में कोटिया भील के नियंत्रण में था, जिसे मारकर बूंदी के समरसिंह के पुत्र जैत्रसिंह ने जीता। बाद में 1631 ई. में मुग़ल बादशाह शाहजहाँ द्वारा […]

1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य

  • उपनाम: राजस्थान की शिक्षा नगरी (Coaching Hub), राजस्थान का कानपुर (औद्योगिक नगरी), उद्यानों का नगर, हाड़ौती का हृदय स्थल, राजस्थान का नालंदा।
  • स्थापना: प्रारंभ में कोटिया भील के नियंत्रण में था, जिसे मारकर बूंदी के समरसिंह के पुत्र जैत्रसिंह ने जीता। बाद में 1631 ई. में मुग़ल बादशाह शाहजहाँ द्वारा बूंदी से अलग कर राव माधोसिंह हाड़ा को कोटा का स्वतंत्र राज्य सौंपा गया।
  • भौगोलिक स्थिति व नदियाँ:
    • प्रमुख नदियाँ: चंबल (राजस्थान की कामधेनु/नित्यवाही नदी), कालीसिंध, आहू, परवन, चंद्रभागा, आलनिया।
    • बांध व जल परियोजनाएं: कोटा बैराज (चंबल नदी पर केवल सिंचाई हेतु निर्मित), जवाहर सागर बांध (पिक-अप बांध), चंबल रिवरफ्रंट (आधुनिक पर्यटन केंद्र)।
    • झीलें व ताल: किशोर सागर तालाब (1346 ई. में बूंदी के राजकुमार धीरदे द्वारा निर्मित), आलनिया बांध, सावन-भादों परियोजना।

2. राजवंश एवं प्रमुख शासक

  • राजवंश: हाड़ा चौहान वंश (अग्निकुल से उत्पन्न चौहानों की हाड़ा शाखा)।
  • कुलदेवी: भड़ाना माता (मूठ की मार से पीड़ित व्यक्तियों का इलाज) एवं आशापुरा माता।
  • प्रमुख शासक व योगदान:
    • राव माधोसिंह प्रथम (1631–1648 ई.): कोटा के प्रथम स्वतंत्र शासक; मुग़ल सेवा में विशेष ख्याति प्राप्त की।
    • राव मुकुंद सिंह हाड़ा: शाहजहाँ के समय धर्मत के युद्ध (1658 ई.) में वीरगति प्राप्त की; अपनी प्रेयसी ‘अबली मीणी’ के लिए मुकुंदरा की पहाड़ियों में ‘अबली मीणी का महल’ बनवाया (जिसे ‘हाड़ौती का ताजमहल’ कहा जाता है)।
    • राव बुद्धसिंह व रामसिंह: उत्तराधिकार संघर्षों में भाग लिया।
    • महाराव भीमसिंह प्रथम: वल्लभ संप्रदाय के परम भक्त; अपना नाम ‘कृष्णदास’ रखा और कोटा का नाम बदलकर ‘नंदग्राम’ कर दिया।
    • महाराव शत्रुशाल प्रथम (शत्रुसाल): भटवाड़ा के युद्ध (1761 ई.) में जयपुर की सेना को पराजित किया।
    • महाराव रामसिंह द्वितीय: 1857 की क्रांति के समय कोटा के शासक, जिन्हें क्रांतिकारियों ने 6 माह तक नजरबंद रखा था।
    • महाराव उम्मेद सिंह द्वितीय: आधुनिक कोटा के निर्माता; उम्मेद भवन पैलेस का निर्माण कराया।

3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ एवं पुरातात्विक स्थल

  • आलनिया (Alaniya): आलनिया नदी के तट पर स्थित प्रागैतिहासिक काल के शैलचित्र (Rock Paintings) प्राप्त हुए हैं।
  • दर्रा/मुकुंदरा शैलचित्र: गुप्तकालीन एवं प्राक-ऐतिहासिक शैल उत्कीर्णन के साक्ष्य।
  • कंसुआ (कंसवा): 738 ई. का मौर्य राजा धवल का शिलालेख प्राप्त (राजस्थान में मौर्यों से संबंधित अंतिम अभिलेख)।

4. प्रमुख दुर्ग, महल एवं स्थापत्य

स्मारक / स्थल निर्माता प्रमुख विशेषता
कोटा का गढ़ (सिटी पैलेस) जैत्रसिंह/माधोसिंह चंबल नदी के तट पर स्थित; कर्नल जेम्स टॉड ने कहा: “आगरा के किले को छोड़कर किसी भी किले का परकोटा इतना बड़ा नहीं है जितना कोटा के गढ़ का।”
अबली मीणी का महल राव मुकुंद सिंह मुकुंदरा पहाड़ियों में स्थित; कर्नल टॉड ने इसे ‘हाड़ौती का ताजमहल’ (राजस्थान का दूसरा ताजमहल) कहा है।
जग मंदिर (जलमहल) रानी ब्रजकंवर (1740 ई.) किशोर सागर तालाब के मध्य स्थित सफेद संगमरमर व लाल पत्थर का सुंदर महल।
उम्मेद भवन पैलेस महाराव उम्मेद सिंह द्वितीय (1905 ई.) विक्टोरियन और राजपूत शैली में निर्मित भव्य रिहायशी महल (वास्तुकार: सर स्विंटन जैकब)।
चारचौमा का शिव मंदिर गुप्त काल (5वीं शताब्दी) राजस्थान का प्राचीनतम सुरक्षित पंचायतन शैली का गुप्तकालीन शिव मंदिर।
मथुराधीश जी का मंदिर महाराव भीमसिंह वल्लभ संप्रदाय की प्रथम पीठ (पाटनपोल, कोटा)।
गेपरनाथ महादेव मंदिर प्राचीन प्राकृतिक स्थल चंबल के गहरे खड्ड (Gorge) में स्थित प्राचीन शिवालय व जलप्रपात।

5. प्रमुख ऐतिहासिक युद्ध एवं घटनाएँ

  • भटवाड़ा का युद्ध (1761 ई., मांगरोल के निकट):
    • कोटा के महाराव शत्रुशाल (सेनापति: झाला जालिम सिंह) और जयपुर के सवाई माधोसिंह प्रथम के मध्य।
    • रणथंभौर दुर्ग पर प्रभुत्व को लेकर हुआ; कोटा विजयी रहा। इस विजय से झाला जालिम सिंह (हाड़ौती का वास्तविक नीति-नियंता) का वर्चस्व स्थापित हुआ।

6. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं संप्रदाय

  • भड़ाना माता मंदिर: मूठ (तांत्रिक प्रयोग) की मार से पीड़ित लोगों के उपचार हेतु प्रसिद्ध तांत्रिक देवी पीठ।
  • कंसुआ का शिव मंदिर: सहस्त्रलिंगी शिवलिंग स्थित है, जिस पर सूर्य की पहली किरण सीधे अभिषेक करती है।
  • विभीषण मंदिर (कैथून): भारत का एकमात्र विभीषण मंदिर (केवल सिर/मुख की पूजा होती है)।
  • बुढ़ादीत का सूर्य मंदिर (दीगोद): 9वीं-10वीं शताब्दी का प्रतिहार कालीन भव्य सूर्य मंदिर।
  • सूफी संत दरगाह:
    • गागरोन से सटा क्षेत्र व साबरमती सूफी दरगाहें: चंबल अंचल में ऐतिहासिक सूफी संतों के मजार स्थल।

7. कला, संस्कृति एवं हस्तशिल्प

  • कोटा चित्रकला शैली:
    • स्वर्णकाल: महाराव उम्मेद सिंह प्रथम का शासनकाल।
    • प्रमुख विशेषता: शिकार के दृश्य (रानियों व नारियों को भी आखेट/शिकार करते हुए चित्रित किया गया है)।
    • प्रमुख चित्रकार: लक्षीराम, डालू (रागमाला सेट के चित्रकार, 1768 ई.), नूर मोहम्मद, गोविंद।
    • रंगों की प्रधानता: हरा, पीला व नीला रंग; घने जंगलों, खजूर के वृक्षों और वन्यजीवों का चित्रण।
  • हस्तशिल्प व वस्त्र उद्योग:
    • कोटा डोरिया / मसूरिया साड़ी: कैथून (कोटा) में निर्मित; इसे जालीदार बुनाई (खट पद्धति) से बनाया जाता है (जीआई टैग प्राप्त)। इसे मैसूर से झाला जालिम सिंह द्वारा लाए गए बुनकर महमूद मसूरिया ने लोकप्रिय बनाया था।
    • कोटा स्टोन: विश्व प्रसिद्ध फर्श का चूना पत्थर (Limestone), जो अपनी मजबूती और पॉलिश के लिए जाना जाता है।
  • दशहरा मेला (कोटा):
    • भारत में मैसूर के बाद सबसे प्रसिद्ध दशहरा मेला; इसकी शुरुआत 1579 ई. में राव माधोसिंह के समय हुई, जबकि इसे भव्य स्वरूप महाराव उम्मेद सिंह प्रथम ने दिया।

8. प्रमुख साहित्यकार, विद्वान एवं संस्थान

  • झाला जालिम सिंह: कूटनीतिज्ञ व इतिहास प्रसिद्ध प्रशासक, जिन्होंने 1817 में अंग्रेजों से पूरक संधि कर अपने वंशजों हेतु झालावाड़ का अलग राज्य तय करवाया।
  • कवि लक्षीराम: कोटा दरबार के प्रसिद्ध चित्रकार एवं साहित्यकार।
  • पंडित नयनूराम शर्मा: हाड़ौती क्षेत्र में जनजागृति के अग्रदूत।
  • प्रमुख वन्यजीव व पर्यावरण केंद्र:
    • मुकुंदरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान (2012): राजस्थान का तीसरा टाइगर रिजर्व (2013 में अधिसूचित)।
    • जवाहर सागर अभयारण्य / चंबल घड़ियाल अभयारण्य: घड़ियालों के संरक्षण हेतु एशिया का प्रसिद्ध जलीय अभयारण्य।

9. 1857 की क्रांति एवं प्रजामंडल आंदोलन

  • 1857 की क्रांति में कोटा का योगदान (15 अक्टूबर 1857):
    • राजस्थान में सबसे सुनियोजित और व्यापक जन-विद्रोह कोटा में हुआ (जनक्रांति)।
    • क्रांतिकारी नेता: रिसालदार जयदयाल एवं मेहराब खां।
    • क्रांतिकारियों ने मेजर बर्टन (पॉलिटिकल एजेंट), उसके दो पुत्रों और डॉक्टर सैडलर की हत्या कर दी। बर्टन का सिर पूरे कोटा शहर में घुमाया गया।
    • महाराव रामसिंह द्वितीय को 6 माह तक महल में नजरबंद रखा गया; बाद में मार्च 1858 में जनरल रॉबर्ट्स की अंग्रेजी सेना व करौली के राजा मदनपाल की सेना ने कोटा को मुक्त कराया।
  • हाड़ौती / कोटा प्रजामंडल:
    • हाड़ौती प्रजामंडल (1934 ई.): पं. नयनूराम शर्मा द्वारा स्थापित।
    • कोटा राज्य प्रजामंडल (1939 ई.): पं. नयनूराम शर्मा एवं अभिन्न हरि द्वारा स्थापित (मांगरोल अधिवेशन प्रसिद्ध)।

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