मुख्य बिंदु: जयपुर जिले (ढूंढाड़ अंचल) के सभी प्रमुख पहलुओं का व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी (Study Notes) संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य प्राचीन नाम: ढूंढाड़ क्षेत्र (ढूंढ नदी के प्रवाह के कारण)। उपनाम: पिंक सिटी (गुलाबी नगरी), भारत का पेरिस, वैभव का द्वीप (Island of Glory – सी.वी. रमन द्वारा), हेरिटेज सिटी। स्थापना: […]
जयपुर जिले (ढूंढाड़ अंचल) के सभी प्रमुख पहलुओं का व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी (Study Notes) संकलन नीचे दिया गया है:
1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य
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प्राचीन नाम: ढूंढाड़ क्षेत्र (ढूंढ नदी के प्रवाह के कारण)।
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उपनाम: पिंक सिटी (गुलाबी नगरी), भारत का पेरिस, वैभव का द्वीप (Island of Glory – सी.वी. रमन द्वारा), हेरिटेज सिटी।
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स्थापना: 18 नवंबर 1727 को सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा।
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वास्तुकार: पंडित विद्याधर भट्टाचार्य (नियोजन: ग्रिड प्रणाली/शतरंज बोर्ड पैटर्न)।
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भौगोलिक स्थिति व नदियाँ:
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प्रमुख नदियाँ: बाणगंगा (उद्गम: बैराठ), साबी (उद्गम: सेवर पहाड़ियाँ), ढूंढ, बांडी, मेंथा।
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झीलें व बांध: सांभर झील (खारे पानी की), कानोता बांध, चंदलाई झील, जमवारामगढ़ बांध।
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पहाड़ियाँ: झालाना, जयगढ़, नाहरगढ़, चील का टीला, सेवर की पहाड़ियाँ।
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2. राजवंश एवं प्रमुख शासक
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राजवंश: कछवाहा वंश (सूर्यवंशी राजपूत, भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज)।
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कुलदेवी: जमवाय माता (रामगढ़)।
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आराध्य देवी: शीला देवी (आमेर)।
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आराध्य देव: गोविंद देव जी।
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प्रमुख शासक:
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दूल्हा राय (तेजकरण): 1137 ई. में बड़गूजरों व मीणों को हराकर ढूंढाड़ में कछवाहा वंश की नींव रखी।
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भारमल (बिहारीमल): 1562 ई. में मुगलों (अकबर) से सर्वप्रथम वैवाहिक संबंध और संधि करने वाला राजपूत शासक।
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मिर्जा राजा मानसिंह प्रथम: हल्दीघाटी युद्ध में मुग़ल सेनापति; बंगाल से शीला माता की मूर्ति लाकर आमेर में स्थापित की।
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मिर्जा राजा जयसिंह: तीन मुगल बादशाहों (जहाँगीर, शाहजहाँ, औरंगजेब) का समकालीन; छत्रपति शिवाजी के साथ पुरंदर की संधि (1665 ई.) की।
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सवाई जयसिंह द्वितीय: जयपुर के संस्थापक, महान खगोलशास्त्री, 5 जंतर-मंतर (वेधशालाओं) का निर्माण कराया (जयपुर, दिल्ली, उज्जैन, मथुरा, वाराणसी)।
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सवाई प्रताप सिंह: हवा महल (1799 ई.) का निर्माण कराया; इनके दरबार में 22 विद्वानों की मंडली ‘गंधर्व बाईसी’ थी।
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सवाई रामसिंह द्वितीय: 1876 ई. में प्रिंस ऑफ वेल्स (एडवर्ड सप्तम) के आगमन पर जयपुर को गुलाबी रंग (गेरुआ) से रंगवाया।
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3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ
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बैराठ (विराटनगर) सभ्यता:
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बाणगंगा नदी के किनारे स्थित।
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महाभारत काल में मत्स्य जनपद की राजधानी।
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मौर्य सम्राट अशोक का ‘भाब्रू शिलालेख’ (खोजकर्ता: कैप्टन बर्ट, 1837) यहीं से मिला।
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बीजक की पहाड़ी, भीम जी की डूंगरी, गणेश डूंगरी आदि पुरातात्विक स्थल।
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बौद्ध स्तूप, गोल बौद्ध मंदिर एवं सूती कपड़े में लिपटे पंचमार्क सिक्के प्राप्त।
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नलियासर (सांभर): चौहान युग एवं पूर्व-गुप्त कालीन अवशेष।
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जोधपुरा सभ्यता: साबी नदी के तट पर स्थित लोहे गलाने की प्राचीन भट्ठियाँ मिलीं।
4. प्रमुख दुर्ग, महल एवं स्थापत्य
| स्मारक / स्थल | निर्माता | प्रमुख विशेषता |
| आमेर दुर्ग | मानसिंह प्रथम (विस्तार: मिर्जा राजा जयसिंह) | दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, शीश महल, गणेश पोल (फर्ग्यूसन ने इसे ‘विश्व का सर्वश्रेष्ठ प्रवेश द्वार’ कहा)। |
| जयगढ़ दुर्ग | मिर्जा राजा जयसिंह (सवाई जयसिंह द्वारा सुदृढ़) | ‘चील का टीला’ पर स्थित, एशिया की सबसे बड़ी पहियों वाली तोप ‘जयबाण’ यहाँ स्थित है। इसे ‘संकटमोचक दुर्ग’ भी कहा जाता है। |
| नाहरगढ़ दुर्ग | सवाई जयसिंह (1734 ई.) | मराठों से सुरक्षा हेतु निर्मित; सवाई माधोसिंह द्वितीय ने अपनी 9 पासवान रानियों के लिए एक जैसे 9 महल बनवाए। इसे ‘सुदर्शनगढ़’ भी कहते हैं। |
| हवा महल | सवाई प्रताप सिंह (1799 ई.) | 5 मंजिला (शरद, रतन, विचित्र, प्रकाश, हवा मंदिर), बिना नींव का महल, 953 खिड़कियाँ व झरोखे; वास्तुकार: लालचंद उस्ता। |
| सिटी पैलेस (चंद्र महल) | सवाई जयसिंह द्वितीय | कछवाहा शासकों का निवास; इसमें मुबारक महल, पोथीखाना, और विश्व के सबसे बड़े चांदी के दो पात्र (गंगजली) रखे हैं। |
| जलमहल | सवाई जयसिंह द्वितीय | मानसागर झील के मध्य स्थित, अश्वमेध यज्ञ के दौरान ब्राह्मणों के विश्राम हेतु निर्मित। |
| ईसरलाट (सरगासूली) | सवाई ईश्वरी सिंह (1747 ई.) | राजमहल युद्ध विजय के उपलक्ष्य में निर्मित 7 मंजिला मीनार। |
5. प्रमुख युद्ध एवं ऐतिहासिक घटनाएँ
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मावंडा-मण्डोली का युद्ध (1767 ई.): जयपुर के सवाई माधोसिंह प्रथम और भरतपुर के राजा जवाहर सिंह के बीच।
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तुंगा का युद्ध (1787 ई.): सवाई प्रताप सिंह व जोधपुर की संयुक्त सेना ने मराठा सेनापति महादजी सिंधिया को पराजित किया।
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पाटन का युद्ध (1790 ई.): मराठों (डी-बोइने के नेतृत्व में) ने जयपुर-जोधपुर की संयुक्त सेना को हराया।
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गंगोली का युद्ध (1807 ई.): मेवाड़ की राजकुमारी कृष्णा कुमारी के विवाह विवाद को लेकर जयपुर (जगतसिंह द्वितीय) व जोधपुर (मानसिंह) के बीच संघर्ष।
6. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं सूफी परंपरा
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प्रमुख मंदिर:
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गोविंद देव जी मंदिर: गौड़ीय संप्रदाय का प्रमुख केंद्र; मूर्ति वृंदावन से लाई गई थी।
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शीला देवी मंदिर (आमेर): मानसिंह प्रथम द्वारा स्थापित महिषासुरमर्दिनी की काले संगमरमर की मूर्ति।
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जगत शिरोमणि मंदिर (आमेर): मानसिंह की पत्नी कनकावती द्वारा पुत्र जगतसिंह की स्मृति में निर्मित; यहाँ श्रीकृष्ण की वही मूर्ति है जिसकी पूजा मीराबाई करती थीं।
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मोती डूंगरी गणेश मंदिर: प्रसिद्ध गणेश तीर्थ।
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गलता जी (उत्तर तोताद्री): गालव ऋषि की तपोभूमि; रामानंदी संप्रदाय की पीठ (संस्थापक: कृष्णदास पयहारी); इसे ‘मंकी वैली’ भी कहा जाता है।
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संत एवं संप्रदाय:
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दादू दयाल जी: ‘राजस्थान के कबीर’; नरेना (नारायणा, जयपुर) में दादू पंथ की प्रधान पीठ स्थित है। दादू वाणी ढूंढाड़ी भाषा में रचित है।
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संत रज्जब जी व सुंदरदास जी: दादू जी के प्रमुख शिष्य।
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सूफी संत एवं दरगाह:
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मौलाना जियाउद्दीन साहब की दरगाह: चारदीवारी क्षेत्र में स्थित।
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हजरत शाह नजमुद्दीन सोहरावर्दी दरगाह: सांभर।
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7. कला, संस्कृति एवं हस्तशिल्प
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चित्रकला (जयपुर शैली):
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स्वर्ण काल: सवाई प्रताप सिंह का शासनकाल।
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विशेषता: आदमकद (Life-size) चित्र (प्रमुख चित्रकार: साहिबराम जिन्होंने ईश्वरी सिंह का आदमकद चित्र बनाया), लाल-पीले रंगों की प्रधानता, उद्यानों के दृश्य।
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हस्तशिल्प व कला:
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ब्लू पॉटरी: पर्शिया (ईरान) से लाहौर होते हुए मानसिंह प्रथम लाए; सवाई रामसिंह द्वितीय के समय सर्वाधिक विकास। प्रसिद्ध कलाकार: पद्मश्री कृपाल सिंह शेखावत।
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मीनाकारी: लाहौर से मानसिंह प्रथम द्वारा लाई गई; प्रसिद्ध शिल्पी: कुदरत सिंह।
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कुंदन कला: स्वर्ण आभूषणों में रत्न जड़ने की कला।
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सांगानेरी व बगरू प्रिंट: प्राकृतिक रंगों और लकड़ी के ठप्पों (ब्लॉक) से छपाई (सांगानेरी प्रिंट को जीआई टैग प्राप्त)।
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जयपुर घराना (कथक): उत्तर भारत के शास्त्रीय नृत्य कथक का आदिम/प्राचीन घराना (प्रवर्तक: भानूजी महाराज)।
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तमाशा लोकनाट्य: सवाई प्रताप सिंह के काल में महाराष्ट्र से बंशीधर भट्ट द्वारा प्रवर्तित।
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8. प्रमुख साहित्यकार, विद्वान एवं ग्रंथ
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पंडित जगन्नाथ सम्राट: सवाई जयसिंह के दरबारी; ग्रंथ: सिद्धांत कौस्तुभ, सिद्धांत सम्राट।
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पुंडरीक रत्नाकर: सवाई जयसिंह के राजगुरु; ग्रंथ: जयसिंह कल्पद्रुम।
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कवि बिहारी: मिर्जा राजा जयसिंह के दरबारी कवि; प्रसिद्ध रचना: बिहारी सतसई (713 दोहे)।
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कवि कलानिधि श्रीकृष्ण भट्ट: सवाई जयसिंह के समकालीन; ग्रंथ: राघव गीतम्, ईश्वरविलास महाकाव्य।
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पंडित विद्याधर भट्टाचार्य: बंगाली विद्वान, जयपुर नगर के मुख्य वास्तुकार।
9. स्वतंत्रता संग्राम एवं प्रजामंडल आंदोलन
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जयपुर प्रजामंडल:
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स्थापना: 1931 ई. में कपूरचंद पाटनी द्वारा (राजस्थान का पहला प्रजामंडल)।
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पुनर्गठन: 1936-37 ई. में जमनालाल बजाज एवं हीरालाल शास्त्री द्वारा।
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जेंटलमैन एग्रीमेंट (1942 ई.): जयपुर के प्रधानमंत्री सर मिर्जा इस्माइल और प्रजामंडल अध्यक्ष हीरालाल शास्त्री के बीच (प्रजामंडल ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ से अलग रहा)।
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आजाद मोर्चा: बाबा हरिश्चंद्र, रामकरण जोशी, दौलतमल भंडारी आदि ने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने हेतु अलग से इसका गठन किया।
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प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी:
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अर्जुन लाल सेठी: राजस्थान में राष्ट्रीय चेतना के जनक; 1907 में ‘जैन वर्धमान विद्यालय’ की स्थापना कर क्रांतिकारियों को प्रशिक्षण दिया। प्रसिद्ध कथन: “यदि अर्जुन लाल नौकरी करेगा तो अंग्रेजों को भारत से बाहर कौन निकालेगा?”
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सेठ जमनालाल बजाज: ‘गांधी जी के पांचवें पुत्र’ व ‘गुलाम नंबर चार’ के उपनाम से प्रसिद्ध।
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हीरालाल शास्त्री: राजस्थान के प्रथम मनोनीत मुख्यमंत्री; आत्मकथा: प्रत्यक्ष जीवन शास्त्र, गीत: नमो नमः (प्रलय प्रतीक्षा); वनस्थली विद्यापीठ (निवाई) के सह-संस्थापक।
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