सामान्य परिचय
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शासक: रणसिंह (इन्हें ऐतिहासिक ख्यातों व अभिलेखों में कर्णसिंह भी कहा गया है)
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राजवंश: गुहिल / गहलौत वंश (मेवाड़)
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पिता: विक्रमसिंह (Vikramasimha)
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शासनकाल: 12वीं शताब्दी के मध्य (लगभग 1158 ई. के आसपास)
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राजधानी: नागदा / आहड़
गुहिल राजवंश का विभाजन (ऐतिहासिक घटनाक्रम)
रणसिंह के शासनकाल की सबसे युगांतरकारी घटना मेवाड़ के गुहिल राजवंश का दो शाखाओं में विभाजित होना है। इनके दो पुत्रों ने दो अलग-अलग शाखाओं और उपाधियों की शुरुआत की:
| शाखा | संस्थापक (पुत्र) | प्रयुक्त उपाधि / पदवी | राजधानी / मुख्य केंद्र | अंतिम / प्रमुख शासक |
| रावल शाखा | क्षेमसिंह (ज्येष्ठ पुत्र) | रावल (Rawal) | चित्तौड़गढ़ / नागदा (मेवाड़ का मूल सिंहासन) | रावल रतनसिंह (1303 ई. – अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण) |
| राणा / सीसोदिया शाखा | राहप (कनिष्ठ पुत्र) | राणा (Rana) / महाराणा | सीसोदा (सिसोदिया) गाँव | राणा हम्मीर (1326 ई. में मेवाड़ का पुनरुद्धार किया) |
प्रशासनिक एवं राजनीतिक महत्व
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सीसोदा जागीर: राहप ने ‘सीसोदा’ ग्राम को अपना ठिकाना बनाया, जिससे आगे चलकर उनके वंशज सिसोदिया कहलाए।
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रावल पदवी का प्रचलन: क्षेमसिंह ने मेवाड़ के मुख्य राजसिंहासन पर बैठकर ‘रावल’ पदवी धारण की, जो 1303 ई. तक निरंतर चली।
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स्थायित्व का प्रयास: परमारों और चालुक्यों के लगातार हो रहे आक्रमणों के बीच रणसिंह ने मेवाड़ की सीमाओं को सुरक्षित रखने का प्रयास किया।
प्रमुख ऐतिहासिक स्रोत
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कुंभलगढ़ प्रशस्ति (1460 ई.): इसमें रणसिंह के समय वंश के विभाजन और राहप द्वारा ‘राणा’ उपाधि धारण करने का विस्तृत विवरण मिलता है।
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एकलिंग महात्म्य: महाराणा कुंभा के काल के इस ग्रंथ में रणसिंह, क्षेमसिंह और राहप की वंशावली का स्पष्ट उल्लेख है।
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रणकपुर प्रशस्ति (1439 ई.): मेवाड़ के शासकों की प्रामाणिक सूची में रणसिंह और उनकी शाखाओं का उल्लेख मिलता है।
महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Micro-facts for UPSC/State PCS/SSC)
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गुहिल वंश का दो शाखाओं में विभाजन: रणसिंह (कर्णसिंह) के काल में (लगभग 1158 ई.)।
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रावल शाखा के प्रवर्तक: क्षेमसिंह (रणसिंह के बड़े पुत्र)।
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राणा / सिसोदिया शाखा के प्रवर्तक: राहप (रणसिंह के छोटे पुत्र)।
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सीसोदा ग्राम के संस्थापक: राहप (इन्हीं के नाम पर वंश ‘सिसोदिया’ कहलाया)।
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रावल शाखा के अंतिम शासक: रावल रतनसिंह (1303 ई. के चित्तौड़ के पहले शाके के समय)।
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राणा शाखा के प्रथम शासक जिन्होंने चित्तौड़ जीता: राणा हम्मीर (1326 ई. – विषम घाटी पंचानन)।

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