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नरवाहन

श्रेणी: प्रमुख व्यक्तित्व, राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति, राजस्थान का मध्यकालीन इतिहास एवं राजवंश | लक्षित परीक्षाएं: RPSC (RAS, SI), RSMSSB (CET, पटवार, VDO, LDC)
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सामान्य परिचय
  • शासक: नरवाहन (Naravahana)
  • राजवंश: गुहिल / गहलौत वंश (मेवाड़)
  • पिता व माता: शासक अलट (आलू रावल) एवं हूण राजकुमारी हरियादेवी
  • शासनकाल: 10वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में (लगभग 971 ई. से 973 ई.)
  • वैवाहिक संबंध: नरवाहन का विवाह चाहमान (चौहान) राजकुमारी से हुआ था (जिन्हें जेजय/जयता की पुत्री बताया गया है), जिससे मेवाड़ और सांभर/नाडोल के चौहानों के बीच राजनीतिक मित्रता स्थापित हुई।
धार्मिक नीति एवं सांस्कृतिक संरक्षण
  • पाशुपत शैव मत को संरक्षण: नरवाहन के काल में मेवाड़ में लकुलीश (पाशुपत) संप्रदाय का अत्यधिक प्रभाव बढ़ा।
  • एकलिंगजी की नाथ प्रशस्ति (971 ई.): नरवाहन के समय उदयपुर के निकट कैलाशपुरी (एकलिंगजी मंदिर के पास लकुलीश मंदिर) में 971 ई. की प्रसिद्ध नाथ प्रशस्ति उत्कीर्ण करवाई गई।
  • प्रमुख आचार्य: इस अभिलेख में पाशुपत संप्रदाय के प्रसिद्ध मुनि वेदशर्मा और सुपरीशितराशि का उल्लेख मिलता है, जिन्हें राज्य का संरक्षण प्राप्त था।
कला, साहित्य एवं दरबारी विद्वान
  • कवि आम्र (Amra): 971 ई. की नाथ प्रशस्ति के रचयिता महाकवि आम्र थे, जो नरवाहन के राजदरबार के प्रमुख विद्वान और कवि थे।
  • लेखक पाल्ह: इस अभिलेख को कायस्थ पाल्ह (Palha) द्वारा लिपिबद्ध किया गया था।
  • प्रशस्ति में चरित्र-चित्रण: अभिलेख में नरवाहन को युद्ध कला में निपुण, विद्वानों का आश्रयदाता और धर्मपरायण शासक बताया गया है।
महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Micro-facts for UPSC/State PCS/SSC)
  • अलट व हूण राजकुमारी हरियादेवी के उत्तराधिकारी: नरवाहन।
  • नाथ प्रशस्ति / एकलिंगजी अभिलेख का वर्ष: 971 ई. (नरवाहन के शासनकाल से संबंधित)।
  • नाथ प्रशस्ति के रचयिता: कवि आम्र।
  • नाथ प्रशस्ति के लेखक (कायस्थ): पाल्ह।
  • संबंधित धार्मिक संप्रदाय: पाशुपत / लकुलीश शैव मत (वेदशर्मा मुनि का उल्लेख)।
  • वंशानुक्रम: अलट $\rightarrow$ नरवाहन $\rightarrow$ शालिवाहन $\rightarrow$ शक्तिकुमार

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