सामान्य परिचय
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शासक: नरवाहन (Naravahana)
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राजवंश: गुहिल / गहलौत वंश (मेवाड़)
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पिता व माता: शासक अलट (आलू रावल) एवं हूण राजकुमारी हरियादेवी
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शासनकाल: 10वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में (लगभग 971 ई. से 973 ई.)
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वैवाहिक संबंध: नरवाहन का विवाह चाहमान (चौहान) राजकुमारी से हुआ था (जिन्हें जेजय/जयता की पुत्री बताया गया है), जिससे मेवाड़ और सांभर/नाडोल के चौहानों के बीच राजनीतिक मित्रता स्थापित हुई।
धार्मिक नीति एवं सांस्कृतिक संरक्षण
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पाशुपत शैव मत को संरक्षण: नरवाहन के काल में मेवाड़ में लकुलीश (पाशुपत) संप्रदाय का अत्यधिक प्रभाव बढ़ा।
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एकलिंगजी की नाथ प्रशस्ति (971 ई.): नरवाहन के समय उदयपुर के निकट कैलाशपुरी (एकलिंगजी मंदिर के पास लकुलीश मंदिर) में 971 ई. की प्रसिद्ध नाथ प्रशस्ति उत्कीर्ण करवाई गई।
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प्रमुख आचार्य: इस अभिलेख में पाशुपत संप्रदाय के प्रसिद्ध मुनि वेदशर्मा और सुपरीशितराशि का उल्लेख मिलता है, जिन्हें राज्य का संरक्षण प्राप्त था।
कला, साहित्य एवं दरबारी विद्वान
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कवि आम्र (Amra): 971 ई. की नाथ प्रशस्ति के रचयिता महाकवि आम्र थे, जो नरवाहन के राजदरबार के प्रमुख विद्वान और कवि थे।
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लेखक पाल्ह: इस अभिलेख को कायस्थ पाल्ह (Palha) द्वारा लिपिबद्ध किया गया था।
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प्रशस्ति में चरित्र-चित्रण: अभिलेख में नरवाहन को युद्ध कला में निपुण, विद्वानों का आश्रयदाता और धर्मपरायण शासक बताया गया है।
महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Micro-facts for UPSC/State PCS/SSC)
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अलट व हूण राजकुमारी हरियादेवी के उत्तराधिकारी: नरवाहन।
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नाथ प्रशस्ति / एकलिंगजी अभिलेख का वर्ष: 971 ई. (नरवाहन के शासनकाल से संबंधित)।
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नाथ प्रशस्ति के रचयिता: कवि आम्र।
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नाथ प्रशस्ति के लेखक (कायस्थ): पाल्ह।
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संबंधित धार्मिक संप्रदाय: पाशुपत / लकुलीश शैव मत (वेदशर्मा मुनि का उल्लेख)।

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