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अलट (आलू रावल)

श्रेणी: प्रमुख व्यक्तित्व, राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति, राजस्थान का मध्यकालीन इतिहास एवं राजवंश | लक्षित परीक्षाएं: RPSC (RAS, SI), RSMSSB (CET, पटवार, VDO, LDC)
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सामान्य परिचय
  • शासक: अलट (ख्यातों में प्रचलित नाम: आलू रावल)
  • राजवंश: गुहिल/गहलौत वंश (मेवाड़)
  • पिता व माता: भर्तृभट्ट द्वितीय (Bhartripatta II) एवं राष्ट्रकूट राजकुमारी महालक्ष्मी
  • शासनकाल: 10वीं शताब्दी (लगभग 951 ई. से 971 ई.)
  • राजधानी: नागदा के साथ-साथ आहड़ (अघाटपुर) को मेवाड़ की दूसरी/व्यापारिक राजधानी बनाया।
प्रमुख सैन्य अभियान एवं वैवाहिक कूटनीति
  • प्रतिहारों के विरुद्ध संघर्ष: गुर्जर-प्रतिहार शासक देवपाल को युद्ध में पराजित किया (कुछ ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार देवपाल मारा गया), जिससे मेवाड़ पर प्रतिहारों का प्रभुत्व समाप्त हुआ और राज्य की संप्रभुता सुदृढ़ हुई।
  • हूणों से वैवाहिक संबंध: अलट ने हूण राजकुमारी हरियादेवी से विवाह किया। यह विवाह राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से मेवाड़ के विस्तार व स्थायित्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।
  • हर्षपुर की स्थापना: आटपुर अभिलेख (977 ई.) के अनुसार, रानी हरियादेवी ने हर्षपुर (हर्षपुर गाँव) की स्थापना की थी।
प्रशासनिक एवं राजस्व व्यवस्था
सारणेश्वर प्रशस्ति (953 ई.) से अलट के समय की शासन और राजस्व प्रणाली की विस्तृत जानकारी मिलती है:
  • नौकरशाही का गठन: अलट मेवाड़ के पहले ऐसे शासक थे जिन्होंने राज्य में संगठित प्रशासनिक नौकरशाही (Bureaucracy) की शुरुआत की।
  • प्रमुख प्रशासनिक पद:
    • अमात्य (महामात्य): मुख्य प्रशासनिक अधिकारी/मंत्री (अभिलेख में ‘मयूर’ का उल्लेख)।
    • संधिविग्रहिक: युद्ध और शांति/विदेश नीति का प्रभारी अधिकारी (दुर्लभराज)।
    • अक्षपटलिक: राजस्व, अभिलेख व लेखा विभाग का प्रमुख (मयूर/समुद्र)।
    • वंदिपति: राजदरबार का मुख्य भाट/प्रशस्तिकार।
    • भिषगाधिराज: मुख्य राजवैद्य/चिकित्सा प्रमुख।
  • कर व्यवस्था: सारणेश्वर प्रशस्ति में व्यापारिक वस्तुओं, दुकानों, आयात-निर्यात तथा धार्मिक दान पर लगने वाले शुल्कों का स्पष्ट उल्लेख है।
आर्थिक सुधार, व्यापार व मुद्रा
  • आहड़ का व्यापारिक उत्थान: अलट ने आहड़ (अघाटपुर) को एक प्रमुख वाणिज्यिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित किया। यहाँ देश-विदेश से व्यापारी आते थे, जिससे राज्य के राजस्व में भारी वृद्धि हुई।
  • सिक्के: इस काल में चांदी और तांबे के सिक्कों के प्रचलन के पुरातात्विक साक्ष्य मिलते हैं।
कला, साहित्य और स्थापत्य
  • वराह मंदिर (आहड़): अलट ने आहड़ में भगवान विष्णु को समर्पित भव्य आदि वराह मंदिर का निर्माण करवाया।
  • सारणेश्वर मंदिर अभिलेख (953 ई.): उदयपुर के सारणेश्वर मंदिर से प्राप्त यह अभिलेख अलट के धार्मिक दान, मंदिर निर्माण और प्रशासनिक अधिकारियों की सूची दर्ज करता है।
  • धार्मिक दृष्टिकोण: वैष्णव और शैव दोनों मतों को समान संरक्षण प्रदान किया।
महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Micro-facts for UPSC/State PCS/SSC)
  • मेवाड़ में नौकरशाही के जनक: अलट (आलू रावल)।
  • आहड़ को राजधानी बनाने वाले प्रथम गुहिल शासक: अलट।
  • हूण राजकुमारी हरियादेवी से विवाह करने वाले शासक: अलट।
  • हर्षपुर की संस्थापक: हूण राजकुमारी हरियादेवी (अलट की पत्नी)।
  • अलट के काल के दो मुख्य ऐतिहासिक अभिलेख:
    1. सारणेश्वर प्रशस्ति (953 ई.) — प्रशासनिक पदों व कर व्यवस्था का स्रोत।
    2. आटपुर (आहड़) अभिलेख (977 ई.) शक्तिकुमार के समय का, जिसमें गुहिल वंशावली व हरियादेवी का उल्लेख है।
  • आहड़ का प्रसिद्ध वराह मंदिर: अलट द्वारा निर्मित।

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