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गुहादित्य (गुहिल)

श्रेणी: प्रमुख व्यक्तित्व, राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति, राजस्थान का मध्यकालीन इतिहास एवं राजवंश | लक्षित परीक्षाएं: RPSC (RAS, SI), RSMSSB (CET, पटवार, VDO, LDC)
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अंतिम सत्यापन:
सामान्य परिचय
  • शासक: गुहादित्य (गुहिल / गुहदत्त)
  • राजवंश: गुहिल / गहलौत वंश (मेवाड़ राजवंश के मूल संस्थापक एवं आदिपुरुष)
  • शासनकाल: 6वीं शताब्दी (लगभग 566 ई. में गुहिल वंश की नींव रखी)
  • उत्पत्ति व पृष्ठभूमि: ऐतिहासिक ख्यातों (कर्नल जेम्स टॉड व मुहणौत नैणसी) के अनुसार, वल्लभी (गुजरात) के मैत्रक शासक शिलादित्य एवं रानी पुष्पावती के पुत्र थे।
  • नामकरण: वल्लभी के पतन के समय गुफा में जन्म लेने और वीरनगर की ब्राह्मणी कमलावती द्वारा गुफा में पालन-पोषण किए जाने के कारण नाम ‘गुहा’ या ‘गुहादित्य’ पड़ा।
  • प्रथम राजधानी / केंद्र: नागदा / ईडर क्षेत्र
प्रमुख सैन्य अभियान एवं राजनीतिक विस्तार
  • ईडर के भील शासक का अंत: स्थानीय परंपराओं के अनुसार, गुहादित्य ने ईडर के भील शासक (मांडलिक भील) को पराजित कर इस क्षेत्र पर अपना स्वतंत्र नियंत्रण स्थापित किया।
  • राजतिलक परंपरा की शुरुआत: भील सरदार द्वारा अपने अंगूठे को काटकर रक्त से गुहादित्य का राजतिलक किया गया। यही परंपरा आगे चलकर मेवाड़ के महाराणाओं के राज्याभिषेक (उंदरी/ओगणा के भील सरदारों द्वारा राजतिलक) का आधार बनी।
  • राजनीतिक स्थिति: 6वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान (मेवाड़-वागड़ क्षेत्र) में एक स्वायत्त राजपूत सत्ता की स्थापना की।
प्रशासनिक व्यवस्था एवं सिक्के
  • आरंभिक प्रशासन: शासन का स्वरूप सामंती और कबीलाई सहयोग पर आधारित था, जिसमें स्थानीय भील समुदाय का सैन्य व प्रशासनिक सहयोग प्रमुख था।
  • सिक्के (मुद्रा प्रणाली):
    • इतिहासकार डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा (G.H. Ojha) को आगरा के पास से चांदी के सिक्के मिले थे, जिन पर नागरी लिपि में ‘श्री गुहिल’ अंकित था।
    • यह पुरातात्विक साक्ष्य गुहादित्य की ऐतिहासिकता और उनके प्रभाव क्षेत्र को प्रमाणित करता है।
धार्मिक दृष्टिकोण एवं ऐतिहासिक स्रोत
  • धार्मिक मत: शैव और सूर्योपासक परंपरा के पोषक।
  • प्रमुख ऐतिहासिक स्रोत व अभिलेख:
    • सामोली अभिलेख (646 ई.): गुहादित्य के 5वें वंशज शिलादित्य के समय का, जो गुहिल वंश के आरंभिक इतिहास और वंशावली को प्रमाणित करता है।
    • आटपुर (आहड़) अभिलेख (977 ई.): गुहादित्य को गुहिल वंश का आदिपुरुष और मूल संस्थापक घोषित करता है।
    • कुंभलगढ़ प्रशस्ति (1460 ई.): इसमें गुहादित्य को ‘विप्र’ (ब्राह्मण) कुल से संबंधित बताया गया है (आनंदपुर/वडनगर परंपरा)।
महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Micro-facts for UPSC/State PCS/SSC)
  • मेवाड़ के गुहिल वंश का संस्थापक / आदिपुरुष: गुहादित्य (566 ई.)।
  • ‘श्री गुहिल’ अंकित चांदी के सिक्के: आगरा से प्राप्त (डॉ. जी. एच. ओझा द्वारा खोजे गए)।
  • पालन-पोषण करने वाली संरक्षिका: ब्राह्मणी कमलावती।
  • राज्याभिषेक परंपरा: भील सरदार द्वारा रक्त से राजतिलक की परंपरा गुहादित्य के समय से आरंभ मानी जाती है।
  • गुहिल वंश की कुलदेवी व कुलदेवता: बाण माता (कुलदेवी) एवं एकलिंग जी / भगवान शिव (इष्टदेव/कुलदेवता)।
  • वंशावली का पहला ज्ञात अभिलेखीय साक्ष्य: सामोली शिलालेख (646 ई.)।

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