प्रामाणिक अध्ययन नोट्स (Reference Archive)

समसामयिकी दिनांक : 26 सितंबर 2026

समसामयिक पढ़ने का समय: ~1 मिनट RPSC / RSMSSB Special
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सत्यापित: 27 September 2026
मुख्य बिंदु: राजस्थान सुजस बुलेटिन (26 सितंबर, 2026) के आधार पर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण और संपूर्ण करंट अफेयर्स नोट्स नीचे दिए गए हैं: 1. उदयपुर संभाग स्तरीय विकास एवं लोकार्पण समारोह (प्रतापगढ़) आयोजन: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रतापगढ़ में आयोजित समारोह में उदयपुर संभाग के 7 जिलों के लिए 924 करोड़ रुपये से अधिक के […]
राजस्थान सुजस बुलेटिन (26 सितंबर, 2026) के आधार पर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण और संपूर्ण करंट अफेयर्स नोट्स नीचे दिए गए हैं:

1. उदयपुर संभाग स्तरीय विकास एवं लोकार्पण समारोह (प्रतापगढ़)

  • आयोजन: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रतापगढ़ में आयोजित समारोह में उदयपुर संभाग के 7 जिलों के लिए 924 करोड़ रुपये से अधिक के 1,452 विकास कार्यों का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया.
  • विकास कार्यों का विवरण:
    • 668 करोड़ रुपये की लागत के 1,029 विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया.
    • 256 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के 423 कार्यों का लोकार्पण कर जनता को समर्पित किए गए.
  • संभाग के जिलों का आवंटन: इन विकास कार्यों में उदयपुर जिले में 166.80 करोड़ के 526 कार्य, डूंगरपुर में 189.85 करोड़ के 105 कार्य, चित्तौड़गढ़ में 164.57 करोड़ के 88 कार्य, बांसवाड़ा में 89.68 करोड़ के 77 कार्य, प्रतापगढ़ में 109.77 करोड़ के 436 कार्य, राजसमंद में 108.50 करोड़ के 130 कार्य तथा सलूंबर में 95.05 करोड़ के 90 कार्य शामिल हैं.

2. जनजातीय विकास और ‘वनगिरि’ ब्रांड का शुभारंभ

  • वन उत्पादों का प्रोत्साहन: जनजातीय क्षेत्र की लघु वन उपज के संग्रहण, मूल्य संवर्धन और विपणन को प्रोत्साहित करने के लिए राजससंघ (राजस्थान जनजाति क्षेत्रीय विकास सहकारी संघ लिमिटेड) द्वारा ‘वनगिरि’ ब्रांड के पहले शहद उत्पाद ‘आदिपराग’ (वाइल्ड फॉरेस्ट हनी) को लॉन्च किया गया.
  • एमओयू (MoU): वन धन विकास केंद्रों के उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देने के लिए राजससंघ और कॉनफैड के मध्य एमओयू का आदान-प्रदान किया गया.
  • कल्याणकारी कदम: आदि कर्मयोगी अभियान के तहत 5,947 केंद्रों का उद्घाटन किया गया है, नए मां-बाड़ी केंद्र खोलने के आदेश दिए गए हैं, तथा विद्यार्थियों के मैस भत्ते को बढ़ाकर 3,250 रुपये प्रतिमाह किया गया है.
  • अन्य योजनाएं: जनजाति कृषकों को 2 लाख 36 हजार मिनिकिट तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर दलित, आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना के तहत 925 करोड़ रुपये के ऋण का वितरण किया गया है.

3. संपर्क 181 हेल्पलाइन और राजस्व न्यायालयों की समीक्षा

  • मुख्य सचिव का निरीक्षण: मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शासन सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क 181 हेल्पलाइन केंद्र का निरीक्षण किया और विभिन्न जिलों के परिवादियों से वीडियो कॉल पर संवाद कर समाधान की स्थिति जानी.
  • विद्युत वितरण निगमों का प्रदर्शन:
    • अजमेर डिस्कॉम: औसत निस्तारण समय 10 दिन तथा संतुष्टि स्तर 78% से अधिक.
    • जयपुर डिस्कॉम: औसत निस्तारण समय 8 दिन तथा संतुष्टि स्तर 82.41%.
    • जोधपुर डिस्कॉम: औसत निस्तारण समय 12 दिन तथा संतुष्टि स्तर 77% से अधिक.
  • राजस्व न्यायालय: राजस्व न्यायालयों की मासिक समीक्षा बैठक में पुराने प्रकरणों को प्राथमिकता देने, स्पष्ट एवं कारणयुक्त आदेश पारित करने और समन की समय पर तामील के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए.

4. ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन 2026-29’

  • बैठक एवं उद्देश्य: प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी एवं दुरुपयोग की रोकथाम के लिए तैयार किए गए इस विजन के तहत प्रशासनिक एवं विभागीय समन्वय के रोडमैप की समीक्षा की गई.
  • चार प्रमुख स्तंभ: प्रवर्तन (Enforcement), पूर्ववर्ती रसायन एवं सिंथेटिक ड्रग्स पर रोक, मांग एवं हानि न्यूनीकरण (Demand & Harm Reduction), तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय (Capacity Building & Coordination).

5. विशेष जिला अध्ययन: धौलपुर (चंबल की पावन भूमि)

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: धौलपुर का इतिहास बुद्ध के काल तक जाता है. मौर्य साम्राज्य और मुगल काल के बाद 8वीं से 10वीं शताब्दी के दौरान यहां चौहानों का शासन रहा.
  • नामकरण: इस शहर की स्थापना 700 ईस्वी में राजा धवल देव (धोलान देव तोमर) द्वारा की गई थी, जिनके नाम पर इसे ‘धवलपुरी’ और बाद में ‘धौलपुर’ कहा गया.
  • प्रमुख स्थल:
    • सिटी पैलेस (धौलपुर पैलेस): लाल बलुआ पत्थर से निर्मित यह भव्य महल शाही परिवार का निवास रहा है, जो अपनी प्राचीन वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है.
    • तालाब-ए-शाही: बाड़ी (धौलपुर) से 5 किमी दूर स्थित इस झील और महल का निर्माण राजकुमार शाहजहां के लिए 1617 ईस्वी में ‘शूटिंग लॉज’ के रूप में किया गया था, जहां सर्दियों में प्रवासी पक्षी आते हैं.
    • रॉयल स्टेपवेल (शाही बावड़ी): निहालेश्वर मंदिर के पीछे स्थित यह चार मंजिला ऐतिहासिक बावड़ी 1873-1880 के बीच निर्मित की गई थी, जिसमें सुंदर कलात्मक खंभे और नक्काशीदार पत्थर हैं.

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