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बांसवाड़ा प्रजामंडल

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सत्यापित: 24 September 2026
मुख्य बिंदु: बांसवाड़ा प्रजामंडल राजस्थान के प्रजामंडल आंदोलनों में एक महत्वपूर्ण संगठन था, जिसने बांसवाड़ा रियासत में जनता को जागरूक करने, आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करने और उत्तरदायी शासन की स्थापना के लिए कार्य किया था। इसके बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ विस्तार से निम्नलिखित हैं: 1. स्थापना वर्ष (Establishment Year) स्थापना वर्ष: 1943 ई. में […]
बांसवाड़ा प्रजामंडल राजस्थान के प्रजामंडल आंदोलनों में एक महत्वपूर्ण संगठन था, जिसने बांसवाड़ा रियासत में जनता को जागरूक करने, आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करने और उत्तरदायी शासन की स्थापना के लिए कार्य किया था। इसके बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ विस्तार से निम्नलिखित हैं:

1. स्थापना वर्ष (Establishment Year)

  • स्थापना वर्ष: 1943 ई. में बांसवाड़ा प्रजामंडल की स्थापना की गई थी।

2. संस्थापक एवं प्रमुख नेता (Founder & Key Leaders)

  • संस्थापक एवं प्रमुख नेता: भूपेंद्रनाथ त्रिवेदी और हरिदेव जोशी।
  • अन्य सहयोगी नेता: धूलजी भाई भावसार, मनीलाल जोशी, और शिवलाल कोटड़िया आदि ने भी इस आंदोलन को संगठित करने में अपना अमूल्य योगदान दिया।

3. मुख्य गतिविधियाँ एवं उपलब्धियाँ (Activities & Achievements)

  • उत्तरदायी शासन की मांग: बांसवाड़ा रियासत में राजा के संरक्षण के अंतर्गत जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा शासन चलाने (उत्तरदायी शासन) की मांग को प्रमुखता से उठाया गया।
  • आदिवासियों और जनजातियों का उत्थान: बांसवाड़ा एक आदिवासी बहुल (वागड़) क्षेत्र था। प्रजामंडल ने यहाँ के आदिवासियों और भीलों पर जागीरदारों द्वारा लगाए जाने वाले अनैतिक करों, बेगार प्रथा (बिना पारिश्रमिक के काम करवाना) और उनके शोषण के खिलाफ पुरजोर आवाज उठाई।
  • रचनात्मक और शैक्षणिक कार्य: भूपेंद्रनाथ त्रिवेदी और हरिदेव जोशी ने क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार और सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए कई संगठन और सभाएँ संचालित कीं।
  • प्रजामंडल की गतिविधियाँ और जन-जागृति: रियासत के दमन के बावजूद इन नेताओं ने गाँव-गाँव जाकर जनता को उनके मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया।

4. कमियाँ एवं सीमाएँ (Limitations & Challenges)

  • रियासत और सामंती प्रतिरोध: बांसवाड़ा रियासत के शासक और जागीरदारों ने शुरुआत में प्रजामंडल की गतिविधियों का कड़ा विरोध किया और कार्यकर्ताओं पर कई प्रकार के प्रतिबंध लगाने की कोशिश की।
  • आर्थिक और संसाधन संबंधी सीमाएँ: दक्षिणी राजस्थान का यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से थोड़ा दुर्गम और आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ था, जिसके कारण बड़े पैमाने पर वित्तीय संसाधन जुटाने में कुछ शुरुआती कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

5. मुख्य विशेषता / विवरण (Key Features / Summary)

  • हरिदेव जोशी का नेतृत्व: बांसवाड़ा प्रजामंडल की पहचान भविष्य के राजनेता और कुशल प्रशासक हरिदेव जोशी (जो बाद में राजस्थान के मुख्यमंत्री भी बने) के जुझारू और ओजस्वी नेतृत्व से जुड़ी हुई है।
  • वागड़ आंचल में राजनीतिक चेतना: डूंगरपुर के साथ-साथ बांसवाड़ा में भी प्रजामंडल आंदोलन ने जनजातीय वर्ग को मुख्यधारा की राष्ट्रीय राजनीति और स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

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